
कविता: नतमस्तक
तुझ्या पादुकांचे दर्शन सुखकारी
माऊली तुझ्या द्वारी नतमस्तक
माऊलीचा गजर पडतो कानावरी
माऊलीचा चरणी पुन्हा नतमस्तक
माऊलीचा महिमा किती गोड
होतो दुःखावर प्रहार क्षणभर
माऊलीचे रूप, ज्ञान अजोड
किती घेऊ, साठवू ओंजळभर
प्रकाशचित्र :
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प्रकाशचित्र – पालखी सोहळा २०१९ |
प्रकाशचित्र – पालखी सोहळा २०१९ |
प्रकाशचित्र – पालखी सोहळा २०१९ |
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